
शहरी क्षेत्रों में टिड्डियों का आगमन: मानसून
से पहले आगमन होने की वज़ह से इनके मार्गों में सूखाग्रस्त क्षेत्र जहाँ
भोजन व आश्रय न मिलने के कारण ये टिड्डियाँ हरी वनस्पति की तलाश में
राजस्थान की तरफ बढ़ती गई। Food and Agriculture Organisation के अनुशार
टिड्डियाँ भोजन की तलाश हेतु शहरी क्षेत्रों में प्रवेश कर रहीं हैं। टिड्डी
एक प्रकार के उष्णकटिबंधीय कीड़े होते हैं जिनके पास उड़ने की अतुलनीय
क्षमता होती है जो विभिन्न प्रकार की फसलों को नुकसान पहुँचाती हैं।सामान्य
तौर पर ये प्रतिदिन 150 किलोमीटर तक उड़ सकती हैं। साथ ही 40-80 मिलियन
टिड्डियाँ 1 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में समायोजित हो सकती हैंभारत में टिड्डियों की निम्निखित चार प्रजातियाँ पाई जाती हैं:- रेगिस्तानी टिड्डी, प्रवासी टिड्डी, बॉम्बे टिड्डी, ट्री टिड्डी।आमतौर पर जुलाई-अक्तूबर के महीनों में इन्हें आसानी से देखा जा सकता है क्योंकि ये गर्मी और बारिश के मौसम में ही सक्रिय होती हैं। वर्ष 1993 में राजस्थान में टिड्डियों ने सबसे ज्यादा फसलों को नुकसान पहुँचाया था। कृषि
एवं किसान कल्याण मंत्रालय (Ministry of Agriculture & Farmers
Welfare) के वनस्पति संरक्षण, संगरोध एवं संग्रह निदेशालय (Directorate of
Plant Protection, Quarantine & Storage) के अधीन आने वाला टिड्डी
चेतावनी संगठन मुख्य रूप से रेगिस्तानी क्षेत्रों राजस्थान और गुजरात जैसे
राज्यों में टिड्डियों की निगरानी, सर्वेक्षण और नियंत्रण के लिये
ज़िम्मेदार है। इसका मुख्यालय फरीदाबाद में स्थित है।
भारत में प्रभाव:
वर्तमान में फसल के नुकसान होने की संभावना कम है क्योंकि किसानों ने
अपनी रबी की फसल की कटाई पहले ही कर ली है।लेकिन महाराष्ट्र में टिड्डियों
की बढ़ती जनसंख्या को लेकर नारंगी उत्पादक काफी चिंतित हैं।टिड्डी
चेतावनी संगठन के अनुसार, भारत में बड़ी समस्या तब होगी जब टिड्डियों की
प्रजनन संख्या में वृद्धि होगी।दरअसल एक मादा टिड्डी 3 महीने के जीवन चक्र
के दौरान 80-90 अंडे देती है।साथ ही इनके प्रजनन में बाधा उत्पन्न न होने
की स्थिति में एक समूह प्रति वर्ग किलोमीटर में 40-80 मिलियन टिड्डियों की
संख्या हो सकती हैं।
प्रयास: टिड्डियों से बचाव हेतु वृक्षों पर कीटनाशक दवाओं का छिडकाव किया जा रहा
है। भारत द्वारा ब्रिटेन को 60 विशेष कीटनाशक स्प्रेयर (मशीन) का ऑर्डर
दिया गया है।ड्रोन से भी कीटनाशक दवाओं का छिडकाव किया जा रहा है।